- "आज ही फ़ैसला करो" का दबाव। सच्चा सौदा जाँच का समय देता है; जल्दबाज़ी ख़ुद सबसे बड़ा सबूत है।
- रिकॉर्ड की सिर्फ़ फोटोकॉपी। ताज़ा जमाबंदी आधिकारिक पोर्टल से ख़ुद निकालिए — विक्रेता के काग़ज़ नहीं, पोर्टल का रिकॉर्ड बोलता है।
- टिप्पणी कॉलम में रहननामा/विवाद। गिरवी रखी ज़मीन का सौदा तब तक नहीं, जब तक क़र्ज़ उतरकर रिकॉर्ड साफ़ न हो जाए।
- ग़ैर-हाज़िर सह-मालिक। "भाई बाहर है, बाद में दस्तख़त हो जाएँगे" — यही वाक्य आगे चलकर मुक़दमा बनता है।
- नक्शे और मौक़े में फ़र्क़। दिखाई ज़मीन और बेचे जा रहे खसरे का मिलान न होना पुरानी चाल है — भू-नक्शे से मिलाइए।
- रास्ता दर्ज नहीं। बिना दर्ज रास्ते वाली ज़मीन जीवन-भर के झगड़े का न्योता है।
- गोचर/सिवाय चक/सरकारी ज़मीन का "सौदा"। जो ज़मीन निजी है ही नहीं, उसे कोई नहीं बेच सकता — क़दम पीछे खींचिए।
- नक़द भुगतान की ज़िद। बैंक से भुगतान और लिखित रसीद — यही आपका सुरक्षा-कवच है।
- ब्लैंक/अधूरे काग़ज़ों पर दस्तख़त। कभी नहीं। हर काग़ज़ पढ़कर, भरकर, समझकर।
- मुख्तारनामे (POA) का धुंधला सौदा। POA से बिक्री में असली मालिक, POA की वैधता और मक़सद — तीनों की सख़्त जाँच कराइए।
एक ही वाक्य में बचाव: रिकॉर्ड ख़ुद निकालो, टिप्पणी पढ़ो, नक्शा मिलाओ, सबके दस्तख़त लो, बैंक से भुगतान करो — और जल्दबाज़ी करने वाले से दूर रहो।
धोखा हो गया है या शक है? तुरंत हमारा फ्रॉड हेल्प डेस्क पढ़िए — पहले 48 घंटों के क़दम, सबूत सूची और शिकायत के रास्ते। अंग्रेज़ी लेख: Fraud red flags।
ध्यान दें: AgriZameen एक स्वतंत्र निजी प्लेटफ़ॉर्म है — कोई सरकारी संस्था नहीं। यह लेख शिक्षा के लिए है, क़ानूनी या कर सलाह नहीं। रिकॉर्ड हमेशा आधिकारिक पोर्टलों (अपना खाता, भू-नक्शा, ई-पंजीयन) पर स्वयं जाँचें और लेन-देन से पहले योग्य वकील/सीए से मिलें। नियम बदलते रहते हैं। समीक्षा: जुलाई 2026।